Tuesday, 13 December 2011

अमर्यादित रिश्तों का सच‏


आज के वर्त्तमान परिदृश्य  में युवा वर्ग के बिच अमर्यादित रिश्तों क़ी चलन बहुत तेजी से बढ़ रही है.
अमर्यादित रिश्ते ना केवल रिश्तों को तार तार कर देते है बल्कि रिश्तों क़ी गरिमा और विश्वाश को भी खो देते है.
इस प्रकार क़ी अमर्यादित रिश्तों क़ी घटनाये आये दिन समाचारों में देखने एवं सुनने को मिलती रहतीं है,
जब हम इस प्रकार क़ी शर्मनाक घटनाएं अखबारों की सुर्खिओं में देखतें है तो मन घृणा और शर्म से भर जाता है और मन में बस एक ही ख्याल आता है क़ी आखिर आज के समाज में रिश्तों क़ी मर्यादा को लोग क्यों नहीं समझ रहे,?
आज समाज में ल़डका अपनी मौसी की बेटी को भगाकर ले जाता है, तो कहीं बहू ने अपने ससुर को पति बना लेती है,
कहीं दामाद सास के भागकर दूसरा विवाह कर लेता  है, तो कहीं भतीजा अपनी हमउम्र बुआ से ही विवाह कर लेता है.
जब इस प्रकार के अमर्यादित रिश्ते बनाए वालों से कारण जानने की कोसिस क़ी जाती है तो वे इसका कारण "प्यार" बताते है.
क्या सच में इस प्रकार क़ी घटनाये प्यार को दर्शाती है?
क्या प्यार में रिश्तों क़ी पवित्रता को बलि चढ़ाना उचित है? 
विसेश्ग्यों के अनुशार ऎसी घटनाएं जीवन में आई तीव्रता का परिणाम है और जब जिंदगी की ग़ाडी अति तीव्रता से चलती और बिना किसी नियम के चलती है तो दुर्घटना होने के अवसर उतने ही बढ़ जाते हैं। कई बार ऎसा भी होता है कि ल़डका या ल़डकी अपनी मौसा या चाची की ल़डकी और ल़डके में अपने भावी जीवनसाथी के गुण देखने लगते हैं। जिस कारण से उक्त ल़डका या ल़डकी उनके रोलमॉडल बन जाते हैं और वैसे ही गुण वाला इंसान या वही इंसान उनके दिलो-दिमाग में रच बस जाता है तो वो उसे पाने के लिए रिश्तों की मर्यादा को तो़डने से भी परहेज नहीं करते हैं, उन्हें लगने लगता है जब उन्हें यहीं सब कुछ मिल रहा है तो बाहर जाने की जरूरत ही नहीं है।

1 comment:

  1. The main thing is that illteracy & narrow thinking of the people

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