Tuesday, 13 December 2011

घरेलु बाज़ार में विदेशी निवेश कितना उचित


भारत में दूकान और घरेलु रोजगार धंधो को पूर्णतया बर्बाद करने आ रही है एक और अमेरिकी कंपनी ...वाल मार्ट 
सभी दुकान वालो और लघु उद्योग वालो को मिलकर इस लुटेरी कंपनी का विरोध करना चाहिए ... सरकार ने इन्हें ५१ % निवेश की अनुमति दी है ....

मनमोहन सिंह जी से प्रश्न पुचाते है की ऐसी भी क्या मज़बूरी आन पड़ी ?
क्या सोनिया अमेरिका में यही इलाज करवा रही थी ?

आपको बता दे की क्रेडिट कार्ड संस्कृति के कारन वालमार्ट का धंधा अमेरिका में मंदा चल रहा है, या बर्बाद होने की कगार तक पहुँच गया है और जैसा की सारी दुनिया का कचरा लाने की भारतीय मानसिकता का पालन करते हुए पिचले ४ वर्षो में 38 अमेरिकी कम्पनियाँ जो मंदी के कारण बर्बाद होने की कगार पर पहुँच गई थी सभी भारत में है और यहाँ मजे से व्यापार कर रही है (कारण आपको भी पता होगा) ....

आपने कभी देखा होगा प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को ओबामा के साथ बहुत प्रसन्न मुद्रा में ... इसका राज क्या है ?

सवाल है की हमारे क्रांतिकारियों ने क्यूँ अपनी जान दी ?
क्यूँ वे शहीद हुए ? किसलिए ? 

कितना गजब का संयोग है भारत में
टीवी कार्यक्रमों में वेश्याये आ रही है ... उसके जरिये
युवाओं को नाग्नातावाद की तरफ खिंचा जा रहा है ...
फिल्मो में अब भारतीय परिधानों की जगह चड्डी बनियानो (मॉडर्न नाम "बिकनी") ने ले ली है
मीडिया में अब खबरों की जगह फूहड़ता और बकवास ने ले ली है ...
युवाओं में अब भारतीय करण की जगह पश्चिमीकरण फैलता जा रहा है ...
हिजड़ो की शादियों के लिए रेलिया की जा रही है ..
भगवे पर चर्च पोषित मीडिया के हमले जारी है ... 
पाकिस्तान से हिन्दुओं का पलायन जारी है ...
भारत में हिन्दुओं का शोषण जारी है
देश में दिन ब दिन अरबो के घोटाले आ रहे है ...
बाबर जैसे अत्याचारी आतंकी की मस्जिद के लिए 
आन्दोलन होते है राम के देश में राम का मंदिर नहीं बन सकता 
गौ कट रही है उसका मांस बेचा जा रहा है.
सरकार काले धन पर मूक चुप बैठी है ...
बाजारवाद और ग्लोबलाइजेशन के नाम पर हम अपनी संस्कृति और बचे खुचे घरेलु रोजगार धंधे भी बर्बाद करने पर तुले है

क्या होगा इस देश का ? ? ?


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