भारत में इस समय अधीरता से 'आकाश ' की प्रतीक्षा है।
'आकाश 'है स्कूली स्लेट जैसा वह टैबलेट कंप्यूटर, जो देश के 22 करोड़ छात्रों को इंटरनेट के आकाश पर पहुँचाने के लिए भारत-भूमि पर अवतरित हो रहा है।
केवल सवा दो हज़ार रूपए मूल्य वाले संसार के इस सबसे सस्ते टैबलेट पीसी से ऐसे शैक्षिक चमत्कारों की भविष्यवाणी की जा रही है, जो किसी और देश में अब तक नहीं हुए।
यह सोचने का कष्ट कोई नहीं करना चाहता कि हर बच्चे के हाथ में कंप्यूटर थमाने के क्या कोई दुष्परिणाम नहीं हो सकते?
'आकाश' नवंबर के अंत से पहले बाज़ार में आने वाला है।
वह इंटरनेट के साथ-साथ फेसबुक, ट्विटर, मीडिया प्लेयर और कंप्यूटर गेम जैसी ऐसी कई सुविधाओं से लैस होगा, जो आजकल के युवाओं की पहली पसंद हैं।
उसके निर्माता शीघ्र ही हर महीने एक लाख 'आकाश' बेचने की आशा कर रहे हैं।
उसे सस्ता रखने और हर छात्र तक पहुँचाने में स्वयं भारत सरकार भी गहरी दिलचस्पी ले रही है।
इस में कोई शक नहीं किं कंप्यूटर का ज्ञान होना आज के समय की परम आवश्यकता है।
इंटरनेट हर तरह की सूचना और संवाद का सबसे तेज माध्यम बन गया है।
छात्र उससे अपने ज्ञान के क्षितिज का असीमित विस्तार कर सकते हैं।
पर, यह भी तो सच है कि इंटरनेट के माध्यम से बच्चों व छात्रों तक ऐसी अपार अवांछित बातें भी पहुंच सकती हैं, जो उन्हें भटका सकती हैं।
उनका चरित्र बिगाड़ सकती हैं।
जीवन बर्बाद कर सकती हैं।
टैबलेट ऐसा लघु कंप्यूटर है, जिसे किसी भी समय और किसी भी जगह इस्तेमाल किया जा सकता है।
माँ-बाप से छिपा कर उसका धड़ल्ले से दुरुपयोग भी हो सकता है।
इसकी क्या गारंटी कि स्कूली बच्चे उसका केवल अपनी पढ़ाई-लिखाई के लिए जानकारी जुटाने, ईमेल लिखने या फेसबुकी मित्रों से संपर्क करने के लिए ही उपयोग करेंगे?
वे मनचाहा संगीत ही नहीं, अश्लील तस्वीरें और वीडियो भी तो डाउनलोड कर सकते हैं?
उनका मन जितना इस तरह की चीजों में लगेगा, क्या उतना ही पढ़ाई-लिखाई में भी लगेगा?
'आकाश 'है स्कूली स्लेट जैसा वह टैबलेट कंप्यूटर, जो देश के 22 करोड़ छात्रों को इंटरनेट के आकाश पर पहुँचाने के लिए भारत-भूमि पर अवतरित हो रहा है।
केवल सवा दो हज़ार रूपए मूल्य वाले संसार के इस सबसे सस्ते टैबलेट पीसी से ऐसे शैक्षिक चमत्कारों की भविष्यवाणी की जा रही है, जो किसी और देश में अब तक नहीं हुए।
यह सोचने का कष्ट कोई नहीं करना चाहता कि हर बच्चे के हाथ में कंप्यूटर थमाने के क्या कोई दुष्परिणाम नहीं हो सकते?
'आकाश' नवंबर के अंत से पहले बाज़ार में आने वाला है।
वह इंटरनेट के साथ-साथ फेसबुक, ट्विटर, मीडिया प्लेयर और कंप्यूटर गेम जैसी ऐसी कई सुविधाओं से लैस होगा, जो आजकल के युवाओं की पहली पसंद हैं।
उसके निर्माता शीघ्र ही हर महीने एक लाख 'आकाश' बेचने की आशा कर रहे हैं।
उसे सस्ता रखने और हर छात्र तक पहुँचाने में स्वयं भारत सरकार भी गहरी दिलचस्पी ले रही है।
इस में कोई शक नहीं किं कंप्यूटर का ज्ञान होना आज के समय की परम आवश्यकता है।
इंटरनेट हर तरह की सूचना और संवाद का सबसे तेज माध्यम बन गया है।
छात्र उससे अपने ज्ञान के क्षितिज का असीमित विस्तार कर सकते हैं।
पर, यह भी तो सच है कि इंटरनेट के माध्यम से बच्चों व छात्रों तक ऐसी अपार अवांछित बातें भी पहुंच सकती हैं, जो उन्हें भटका सकती हैं।
उनका चरित्र बिगाड़ सकती हैं।
जीवन बर्बाद कर सकती हैं।
टैबलेट ऐसा लघु कंप्यूटर है, जिसे किसी भी समय और किसी भी जगह इस्तेमाल किया जा सकता है।
माँ-बाप से छिपा कर उसका धड़ल्ले से दुरुपयोग भी हो सकता है।
इसकी क्या गारंटी कि स्कूली बच्चे उसका केवल अपनी पढ़ाई-लिखाई के लिए जानकारी जुटाने, ईमेल लिखने या फेसबुकी मित्रों से संपर्क करने के लिए ही उपयोग करेंगे?
वे मनचाहा संगीत ही नहीं, अश्लील तस्वीरें और वीडियो भी तो डाउनलोड कर सकते हैं?
उनका मन जितना इस तरह की चीजों में लगेगा, क्या उतना ही पढ़ाई-लिखाई में भी लगेगा?
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