ऐश्वर्या राय बच्चन को बेटी होना बेटे से बेहतर है। इससे होगा यह कि बेटियों के पक्ष में थोड़ा-सा माहौल बनेगा और लोग लिंग परीक्षण से परहेज करेंगे।
इससे बेटियों के पक्ष में थोड़ा-सा माहौल बनेगा और लोग लिंग परीक्षण से परहेज करेंगे। चाहे आपकी नीयत लड़का-लड़की में भेद करने की नहीं हो, पर यदि आप लिंग परीक्षण करा लेते हैं, तो उस रोमांच से वंचित हो जाते हैं जो सौर ग्रह से खबर के रूप में आता है (Which announce by Nurse )। उस रोमांच का, उस एक पल का मजा वही जानते हैं जो पिता या दादा-दादी, नाना-नानी बने हैं।
ऐश्वर्या को बेटा होता तो बहुत लोगों में यह संदेश जाता कि ऐश्वर्या राय के गर्भ धारण की खबरें पहले भी आती रही हैं। पहले गर्भ में बेटियाँ रही होंगी सो अबॉर्शन कराती रहीं और अब बेटा पेट में आया तो उसे जन्म दे दिया। समाज का एक अधपढ़ा वर्ग तो जरूर ऐसा है, जिसके मन में इस तरह की बातें उठतीं।
फिर इसका परिणाम यह होता कि उस वर्ग की बहुत-सी महिलाएँ गर्भ में बेटियों को मरवातीं और सोचतीं कि जब ऐश्वर्या ऐसा कर सकती हैं, तो वे क्यों नहीं। अमिताभ भी एक मंच पर पोते की ख्वाहिश जाहिर कर चुके थे, सो सबको यही शक होता कि ऐश्वर्या ने चुनकर, सोच-समझकर और तरकीबें लगाकर बेटा पैदा किया है। मगर कुदरत ने जो किया बहुत अच्छा किया।
अभिषेक-ऐश्वर्या का सम्मान लोगों के मन में और बढ़ गया है कि उन्होंने बेटी पैदा की। अमिताभ दादा बने हैं, खुशी की बात है। पर इससे भी ज्यादा खुशी इस बात की है कि उन्हें पोता नहीं पोती हुई है। लक्ष्मी और सरस्वती से भरे पूरे घर में साक्षात लक्ष्मी आई है। सरस्वती की भी इस पर उतनी ही कृपा हो, जितनी अमिताभ पर है। अमिताभ की पोती इस मामले में तो बहुत ही खुशनसीब है कि पूरा देश उसे दुआएँ दे रहा है।
ऐश्वर्या चाहतीं तो शिशु का लिंग परीक्षण करा सकती थीं और यह सुनिश्चित कर सकती थीं कि पहली संतान के रूप में उनके यहाँ बेटी नहीं हो क्योकि उनको सारी चिकित्सा सुविधाएँ उपलब्ध थीं। किन्तु उन्होंने न तो शिशु का लिंग परीक्षण कराया और न ही बेटी पैदा करने में झिझक दिखाई।
इससे बेटियों के पक्ष में थोड़ा-सा माहौल बनेगा और लोग लिंग परीक्षण से परहेज करेंगे। चाहे आपकी नीयत लड़का-लड़की में भेद करने की नहीं हो, पर यदि आप लिंग परीक्षण करा लेते हैं, तो उस रोमांच से वंचित हो जाते हैं जो सौर ग्रह से खबर के रूप में आता है (Which announce by Nurse )। उस रोमांच का, उस एक पल का मजा वही जानते हैं जो पिता या दादा-दादी, नाना-नानी बने हैं।
ऐश्वर्या को बेटा होता तो बहुत लोगों में यह संदेश जाता कि ऐश्वर्या राय के गर्भ धारण की खबरें पहले भी आती रही हैं। पहले गर्भ में बेटियाँ रही होंगी सो अबॉर्शन कराती रहीं और अब बेटा पेट में आया तो उसे जन्म दे दिया। समाज का एक अधपढ़ा वर्ग तो जरूर ऐसा है, जिसके मन में इस तरह की बातें उठतीं।
फिर इसका परिणाम यह होता कि उस वर्ग की बहुत-सी महिलाएँ गर्भ में बेटियों को मरवातीं और सोचतीं कि जब ऐश्वर्या ऐसा कर सकती हैं, तो वे क्यों नहीं। अमिताभ भी एक मंच पर पोते की ख्वाहिश जाहिर कर चुके थे, सो सबको यही शक होता कि ऐश्वर्या ने चुनकर, सोच-समझकर और तरकीबें लगाकर बेटा पैदा किया है। मगर कुदरत ने जो किया बहुत अच्छा किया।
अभिषेक-ऐश्वर्या का सम्मान लोगों के मन में और बढ़ गया है कि उन्होंने बेटी पैदा की। अमिताभ दादा बने हैं, खुशी की बात है। पर इससे भी ज्यादा खुशी इस बात की है कि उन्हें पोता नहीं पोती हुई है। लक्ष्मी और सरस्वती से भरे पूरे घर में साक्षात लक्ष्मी आई है। सरस्वती की भी इस पर उतनी ही कृपा हो, जितनी अमिताभ पर है। अमिताभ की पोती इस मामले में तो बहुत ही खुशनसीब है कि पूरा देश उसे दुआएँ दे रहा है।
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