दोस्तों एक तरह आज सुबह पूरा देश अफजल के फाँसी को लेकर खुसिओन से झूम उठा है वहीँ इस के दुसरे पक्ष से अभी तक अनभिज्ञ है.
सिर्फ तकनीकी कारणों गांधीजी की ह्त्या के केस में सज़ा से बचने वाले
सावरकर जी की उसी संसद में आज फोटो लगी हुई है। वहीँ बिना सबूत, बिना पूरी
सुनवाई अगर किसी को सिर्फ इसलिए फांसी दे दी जाय की देश की संसद पर हमला
हुआ है और लोगों की भावनाओं का सवाल है,
सारी जिरह, बहस और सबूतों में
कुछ न ढूंढ पाने के बाद कहा कि संसद पर इत्ता बड़ा हमला हुआ किसी को तो
फंसी मिलनी चाहिए।मारे गए आतंकियों के फोन में इसका नंबर मिला है तो इसको
फंसी दे दो। आतंकियों के फोन में पुलिस वालों का भी नंबर था, एस टी एफ
वालों का, तो उनकों भी क्यों ना लटका दिया जाए?
यह हिन्दू तुष्टिकरण नहीं तो और क्या है?
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