Wednesday, 6 February 2013

आस्था का महापर्व कुम्भ


   कुम्भ  हिन्दुओं का एक महत्वपूर्ण पर्व है, जिसका आयोजन प्रति बारहवें वर्ष में होता है, जिसमें करोड़ों श्रद्धालु  स्नान करते हैं। यह आयोजन हर तीन वर्ष के बाद नासिक, इलाहाबाद, उज्जैन और हरिद्वार में बारी-बारी से किया जाता है। इनमें प्रयाग कुम्भ सबसे भव्य और पवित्र माना जाता है। इस स्थान को ब्रह्मांड का उद्गम और पृथ्वी का केंद्र भी माना गया है। ऐसी मान्यता है कि ब्रह्मांड की रचना से पहले ब्रह्माजी ने यहीं अश्वमेध यज्ञ किया था।
     अभी हाल में हीं ब्रिटिश और भारतीय शोधकर्ताओं ने चार साल के गहन अध्ययन के पाया कि इलाहाबाद में गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के संगम पर आयोजित महाकुम्भ विश्व के सबसे विशालतम धार्मिक जमावड़े में से एक है और यह पृथ्वी पर सबसे बड़ा मेला है।
        कुम्भ सिर्फ एक हिन्दू पर्व ही नहीं बल्कि हमारी राष्ट्रीयता का प्रतीक है, जिसमे सभी पंथ और संप्रदाय के लोग सम्मीलित होकर 'हम भारतीय एक है' कि गवाही देते है और साक्ष्य बनते है: शैव, वैष्णव, शाक्त, अघोर पंथी, उदासी, सिक्ख, जैन और बौद्ध मतावलंबी। 
 
कुम्भ स्नान कि सार्थकता
   कुम्भ स्नान की सार्थकता तभी है जब पवित्र नदियों के जल को पवित्र रखा जाये।  सिर्फ मेला प्रशासन का ही नहीं बल्कि हमारा भी दायित्व है कि नदी के घाट पर एवं नदी में किसी तरह की गंदगी न फैले। हमें यथा सम्भव कोसिस करना चाहिए कि इस स्थान का महत्व और पवित्रता दोनों चिर स्थाई बने रहें।
लोक मान्यताओं के अनुसार गंगा जहां होती है, वह स्थान तपोवन हो जाता है और पवित्र नदियों का तट सिद्ध क्षेत्र है। यह स्थान दूषित न हो, इस बात का ध्यान रखना भी आवश्यक है, क्योंकि सही मायनों में कुम्भ स्नान तभी सार्थक होगा। 

कुम्भ पर्व का आयोजन 4 प्रकार से होता है.
  1. कुम्भ राशि में बृहस्पति का प्रवेश होने पर एवं मेष राशि में सूर्य का प्रवेश होने पर कुम्भ का पर्व हरिद्वार में आयोजित किया जाता है। 
  2. मेष राशि के चक्र में बृहस्पति एवं सूर्य और चन्द्र के मकर राशि में प्रवेश करने पर अमावस्या के दिन कुम्भ का पर्व प्रयाग में आयोजित किया जाता है। (एक अन्य गणना के अनुसार मकर राशि में सूर्य का एवं वृष राशि में बृहस्पति का प्रवेश होनें पर कुम्भ पर्व प्रयाग में आयोजित होता है।)
  3. सिंह राशि में बृहस्पति के प्रवेश होने पर कुम्भ पर्व गोदावरी के तट पर नासिक में होता है।
  4. सिंह राशि में बृहस्पति एवं मेष राशि में सूर्य का प्रवेश होने पर यह पर्व उज्जैन में होता है।

अधिक जानकारी के लिए कृपया www.kumbhmelaallahabad.gov.in पर विजिट करें।

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