Saturday, 9 February 2013
Thursday, 7 February 2013
रोज डे
7 फ़रवरी! एक ऐसा दिन जिसे आज के समय में समाज का एक 'खाश' वर्ग रोज डे के रूप में मनाता है. इस दिन हमारे समाज का वह 'खाश' तबका एक दूसरे को गुलाब का फूल भेंट कर अपनी भावनाओं का इजहार करते हैं.
अपनी भावनाओं को अभिव्यक्त करने की स्वतंत्रता सभी को है और यह एक सीमा तक उचित भी है, किन्तु अपनी स्वतंत्रता की दुहाई दे कर समाज में सांस्कृतिक या अन्य तरीके से गंदगी फैलाना गलत है. आये दिन वैलेंटाइन के नाम पर हमारे समाज का वह 'खास' तबका ट्रेन, यात्री बस, मेट्रो और सार्वजनिक पार्क आदि जगहों पर खुलेआम प्रेमालाप, आलिंगन बद्ध या चुंबन में व्यस्त नजर आते हैं. उस समय समाज का वह 'खास' तबका शायद भूल जाता है कि हमारे साथ कई अन्य लोग भी इस समाज का हिस्सा है, जो ऐसी चीजों को सार्वजनिक स्थलों पर पसंद नहीं करते और ऐसी स्थिति में वे बेहद असहज महसूस करते हैं.हमारे संविधान में एक तरफ जहाँ अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता है वही दूसरी तरफ सार्वजनिक स्थलों पर अश्लील हरकतें करने पर दंड और जुर्माने का प्रावधान भी है,
लेकिन क्या हमें नैतिकता सिखाने के लिए दंड ही एकमात्र रास्ता बचता है?
क्या हमारे समाज का वह 'खाश' वर्ग अपने लिए ऐसे नियम नहीं बना सकती जिससे वह समाज के बंधनों को तोड़े बिना अपनी आजादी मना सके?
अपनी भावनाओं को अभिव्यक्त करने की स्वतंत्रता सभी को है और यह एक सीमा तक उचित भी है, किन्तु अपनी स्वतंत्रता की दुहाई दे कर समाज में सांस्कृतिक या अन्य तरीके से गंदगी फैलाना गलत है. आये दिन वैलेंटाइन के नाम पर हमारे समाज का वह 'खास' तबका ट्रेन, यात्री बस, मेट्रो और सार्वजनिक पार्क आदि जगहों पर खुलेआम प्रेमालाप, आलिंगन बद्ध या चुंबन में व्यस्त नजर आते हैं. उस समय समाज का वह 'खास' तबका शायद भूल जाता है कि हमारे साथ कई अन्य लोग भी इस समाज का हिस्सा है, जो ऐसी चीजों को सार्वजनिक स्थलों पर पसंद नहीं करते और ऐसी स्थिति में वे बेहद असहज महसूस करते हैं.हमारे संविधान में एक तरफ जहाँ अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता है वही दूसरी तरफ सार्वजनिक स्थलों पर अश्लील हरकतें करने पर दंड और जुर्माने का प्रावधान भी है,
लेकिन क्या हमें नैतिकता सिखाने के लिए दंड ही एकमात्र रास्ता बचता है?
क्या हमारे समाज का वह 'खाश' वर्ग अपने लिए ऐसे नियम नहीं बना सकती जिससे वह समाज के बंधनों को तोड़े बिना अपनी आजादी मना सके?
Wednesday, 6 February 2013
आस्था का महापर्व कुम्भ
कुम्भ हिन्दुओं का एक महत्वपूर्ण पर्व है, जिसका आयोजन प्रति बारहवें वर्ष में होता है, जिसमें करोड़ों श्रद्धालु स्नान करते हैं। यह आयोजन हर तीन वर्ष के बाद नासिक, इलाहाबाद, उज्जैन और हरिद्वार में बारी-बारी से किया जाता है। इनमें प्रयाग कुम्भ सबसे भव्य और पवित्र माना जाता है। इस स्थान को ब्रह्मांड का उद्गम और पृथ्वी का केंद्र भी माना गया है। ऐसी मान्यता है कि ब्रह्मांड की रचना से पहले ब्रह्माजी ने यहीं अश्वमेध यज्ञ किया था।
अभी हाल में हीं ब्रिटिश और भारतीय शोधकर्ताओं ने चार साल के गहन अध्ययन के पाया कि इलाहाबाद में गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के संगम पर आयोजित महाकुम्भ विश्व के सबसे विशालतम धार्मिक जमावड़े में से एक है और यह पृथ्वी पर सबसे बड़ा मेला है।
कुम्भ सिर्फ एक हिन्दू पर्व ही नहीं बल्कि हमारी राष्ट्रीयता का प्रतीक है, जिसमे सभी पंथ और संप्रदाय के लोग सम्मीलित होकर 'हम भारतीय एक है' कि गवाही देते है और साक्ष्य बनते है: शैव, वैष्णव, शाक्त, अघोर पंथी, उदासी, सिक्ख, जैन और बौद्ध मतावलंबी।
कुम्भ स्नान कि सार्थकता
कुम्भ स्नान की सार्थकता तभी है जब पवित्र नदियों के जल को पवित्र रखा जाये। सिर्फ मेला प्रशासन का ही नहीं बल्कि हमारा भी दायित्व है कि नदी के घाट पर एवं नदी में किसी तरह की गंदगी न फैले। हमें यथा सम्भव कोसिस करना चाहिए कि इस स्थान का महत्व और पवित्रता दोनों चिर स्थाई बने रहें।
लोक मान्यताओं के अनुसार गंगा जहां होती है, वह स्थान तपोवन हो जाता है और पवित्र नदियों का तट सिद्ध क्षेत्र है। यह स्थान दूषित न हो, इस बात का ध्यान रखना भी आवश्यक है, क्योंकि सही मायनों में कुम्भ स्नान तभी सार्थक होगा।
कुम्भ पर्व का आयोजन 4 प्रकार से होता है.
- कुम्भ राशि में बृहस्पति का प्रवेश होने पर एवं मेष राशि में सूर्य का प्रवेश होने पर कुम्भ का पर्व हरिद्वार में आयोजित किया जाता है।
- मेष राशि के चक्र में बृहस्पति एवं सूर्य और चन्द्र के मकर राशि में प्रवेश करने पर अमावस्या के दिन कुम्भ का पर्व प्रयाग में आयोजित किया जाता है। (एक अन्य गणना के अनुसार मकर राशि में सूर्य का एवं वृष राशि में बृहस्पति का प्रवेश होनें पर कुम्भ पर्व प्रयाग में आयोजित होता है।)
- सिंह राशि में बृहस्पति के प्रवेश होने पर कुम्भ पर्व गोदावरी के तट पर नासिक में होता है।
- सिंह राशि में बृहस्पति एवं मेष राशि में सूर्य का प्रवेश होने पर यह पर्व उज्जैन में होता है।
Tuesday, 5 February 2013
क्या यही है ग्लैमर वर्ल्ड!
रविवार को पोर्न स्टार सन्नी लियोन ने ट्वीट किया था कि बलात्कार अपराध नहीं बल्कि सरप्राइज सेक्स होता है। सन्नी लियोन का ये ट्वीट कई जगह छप गया। बहुत से लोगों ने ट्विटर पर उनके कमेंट को रीट्वीट भी कर दिया। विवाद बढ़ने के बाद सनी द्वारा स्वयं अपना यह ट्वीट डिलीट कर दिया और अपने फॉलोवर्स को धमकी भी दी कि वह अपने कमेंट्स और ट्वीट्स को डिलीट कर दें नहीं तो वह उन्हें ब्लॉक कर देंगी।
भारत में यह कोई पहली घटना नहीं है जब अभिनेत्रियां/ अभिनेता सोशल नेटवर्किंग अकाउंट को पब्लिसिटी का माध्यम बनाते रहें हैं लेकिन इस बार जो हुआ उसने तो संवेदनहीनता की सारी हदें पार कर दी।
खैर यह गलती उनकी नहीं हमारी है। एक तरफ हमारा समाज जहाँ प्रेम संबंध, जाति प्रथा आदि के प्रति तो अपने आप को सख्त रवैया अपनाते हुए दिखाता है, वहीँ दूसरी तरफ 'पोर्न वर्ल्ड' से आयी पोर्न स्टार सन्नी लियोन को पहले छोटे पर्दे और फिर बड़े पर्दे पर खूब हो-हल्ले के बाद आम जनता ने भी उन्हें पूरी आत्मीयता के साथ स्वीकार किया। भला एक पोर्न स्टार से आप और उम्मीद भी क्या कर सकतें है...
एक छोटे से ट्वीट ने समाज के उस वर्ग को आहत कर दिया जो गैंग रेप की घटना के बाद एकसाथ होकर आगे आये है। उन भावनाओं को क्षतिग्रस्त कर दिया जो उस मासूम पीड़िता के लिए जागी थीं।
Sunday, 3 February 2013
मौत का नंगा नाच: क्लिनिकल ड्रग ट्रायल
देश में 'क्लिनिकल ड्रग ट्रायल' पर कोई सख्त कानून नहीं होने के कारण नामीगीरामी डॉक्टर बेधड़क ड्रग ट्रायल करके कंपनियो से धन कमाते हैं और मरीज से भी पूरा पैसा वसूलते है. ट्रायल कि जानकारी मरीज या उसके परिजनों को देना तो दूर उससे बीमारी व इलाज के बारे में पूछने पर ये सीधे मुँह बात तक नहीं करते. इसमें बड़े शहरों के बड़े हॉस्पिटल भी सामील है जो की बिना किसी रोकटोक के ड्रग ट्रायल में लगे हुए है.इस मामले में मध्य प्रदेश के चिकित्सा शिक्षा मंत्री का एक बयां जिसमे उन्होंने कहा था कि "इस मामले में कुछ नहीं किया जा सकता है", निराशा जनक है एवं डाक्टरों को जिस तरह बचाया जा रहा है उससे भ्रष्टाचार की बु आ रही है.
अगर बात करें ड्रग ट्रायल के मामले की तो सर्वोच्चन न्यायालय में इसकी पीटीसन लगी है, जिसके बाद सरकार को कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए है. साथ ही राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग, ड्रग कंट्रोलर और अनुसूचित जाति आय़ोग संज्ञांन ले चुका है. लेकिन सरकार की तरफ से सिर्फ खाना पूर्ति ही की गई है. हमारे विधि सलाहकार के अनुसार एमपी सिविल सेवा आचरण अधिनियम 1965,भ्रष्टाचार अधिनियम 1988 और आईपीसी के तहत इन डाक्टरो के खिलाफ कार्यवाई की जासकती है. साथ हीं आईएमए के उल्लंघन 1956 धारा 20ए के उल्लंघन पर धारा 24 ए के अंतर्गत स्टेट मेडिकल कौंसिल विधि संगत कार्रवाई कर सकता है.
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