Tuesday, 6 August 2013

भारत में राजनीती उद्द्योग का विकाश

           
भारत में राजनीती एक उद्योग (Industry) का रूप ले चुकी है, जिसका उद्देश्य धनोपार्जन मात्र बन गया है। वर्तमान में सभी राजनितिक पार्टियाँ अपनी कम्पनी अर्थात पार्टी को अलग ब्रांड नेम से चला रहा है।
कोई अपने पार्टी चलने के लिए समाजवाद को अपना ब्रांड नेम बनता है और फिर परिवारवाद चला रहा है तो कोई दलित उत्थान के ब्रांड नेम के साथ दलितों के कल्याण के पैसे से स्मारक बनवाता है।
           इतना ही नहीं कुछ राजनितिक पार्टियाँ तो मन्दिर – मस्जिद को हिन् अपना ब्रांड नेम बना चुकीं है और इसी ब्रांड नेम के सहारे अपनी राजनीती की दुकान चला रहें है।
इन सबके बिच कोई बंश वाद के सहारे सत्तासीन है, तो कोई टोपी पहन कर अपनेआप को धर्मनिरपेक्षता का श्वघोसित ठेकेदार साबित करने पर तुला है और डर की राजनीती से अपना "राजनितिक उद्योग" चलने में व्यस्त है।
कोई अल्पसंख्यकों के नाम पर तो कोई बहुसख्यक वर्ग के हितो को बाट कर अपना खजाना भरने में व्यस्त है।
अगर देखा जाये तो इनसब के लिए दोषी कही न कही इनके झूठे नारों और प्रलोभनों में आकर इनका समर्थन करने वाले लोग हीं है, जो जाती, धर्म, भाषा और झूठा अपनापन के आस मे अपने और आने बाली पीढयो के साथ-साथ समाज और देश को भी गर्त ढकेल रहें है।

Saturday, 3 August 2013

लोकतंत्र या "भ्रष्ट्रतंत्र"?

उत्तरप्रदेश के गौतमबुद्धनगर जिला में जिस प्रकार से सिर्फ सांप्रदायिक सौहार्द बिगड़ने मात्र की आशंका से एक शांत और अपने काम में लगी रहने वाली महिला IAS अधिकारी दुर्गा शक्ति को जहाँ मात्र  41 मिनट में सस्पेंशन लेटर थमा दिया जाता है वही पिछले साल मथुरा के कोसीकलां में हिंसा हुई, उसमें किसी को निलंबित नहीं किया गया। प्रतापगढ़ में एक समुदाय के मकान जला दिए गए, लेकिन डीएम के खिलाफ कोई कार्रवाई तक नहीं हुई।
            इसी तरह बरेली में दो-दो दंगे हुए, लखनऊ, इलाहाबाद, मेरठ, मुजफ्फरनगर भी साम्प्रदायिक दंगों का शिकार हुआ लेकिन यहां किसी आईएएस अफसर पर कोई भी कार्यवायी  नहीं की गई।
           फैजाबाद दंगों में भी किसी आईएएस के खिलाफ कोई कार्यवायी नहीं की गई। यही नहीं पशु तस्‍करी मामले में पिछले साल जब् गोंडा के एसपी ने एक स्टिंग ऑपरेशन कर लिया और उसमें एक राज्यामंत्री का नाम सामने आया तो यूपी सरकार ने बजाए उस राज्य मंत्री पर कार्यवायी करने के उलटे एसपी को ही पद से हटा दिया
          उत्तरप्रदेश के  403 सदस्यों वाले सदन में 47 फीसदी विधायक 189 विधायक दागी हैं। जबकि 2007 में 140 दागी विधायक सदन में थे। इस दफा चुने गए विधायकों में से 98 के खिलाफ गंभीर आपराधिक मामले हैं। सपा के 224 विधायकों में से 111 दागी हैं।
जून 2012 में विधानसभा सत्र के दौरान मुख्यमंत्री ने स्वीकार किया था कि 1 मार्च से 15 अप्रैल के बीच प्रदेश में 669 हत्याएं, 35 डकैतियां, 263 बलात्कार 429 लूट और वाहन चोरी के 3256 मुक़दमें प्रदेश के विभिन्न थानों में दर्ज किये गये थे।
क्या यही है लोकतंत्र?

Friday, 2 August 2013

आखिरकार हो हीं जायेगा भारत का 29वाँ टुकड़ा

               भारत में छोटे राज्यों का गठन कोई नयी बात नहीं है. समय-समय पर यहाँ नए नए राज्यों के गठन की मांग  उठते रहे है, उन्ही में से एक है "तेलंगाना" जो वर्तमान में तो आंध्रप्रदेश राज्य का हिस्सा  है किन्तु जल्दी ही भारत के नक़्शे पर यह 10 ( मेडक, महबूबनगर, आदिलाबाद, निजामाबाद, करीमनगर. हैदराबाद, खम्मम, नलगोंडा, वारंगल, रंगारेड्डी) जिलों के साथ एक नए राज्य के रूप में दिखेगा।
               लोकसभा चुनाव नजदीक आने के साथ ही केंद्र सरकार ने आंध्र प्रदेश में अलग तेलंगाना राज्य बनाने का मन बना लिया है। इस मामले में पिछले दिनों कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूपीए गठबंधन ने मुहर लगा दी थी।  हमेशा की तरह इस बार भी इस नए राज्य के गठन  जहाँ कुछ लोग खुश है तो वहीं दूसरी तरह बहुत से लोग आंध्रप्रदेश के विभाजन के इस फैसले से नाराज भी है।
        तेलंगाना के गठन के सरकार की इस फैसले बाद अब  बुंदेलखंड, हरित प्रदेश, विदर्भ, पूर्वांचल, गोरखालैंड, बोडोलैंड जैसे छोटे राज्यों के गठन की मांग ने जोर पकड़ लिया है।
देखना अब यह है की  टुकड़े होंगे भारत के।