Thursday, 21 September 2017

बेरोजगारी और महंगाई; एक समाधान

दोस्तो! महंगाई और बेरोजगारी पर बातें तो सभी करते हैं और एक दूसरे पर दोषारोपण भी खुब होता है, लेकिन दिन पर दिन बढ़ती इस समस्या का हल कोई नहीं सुझाता|
आईये आज हम इस समस्या के कारण और निवारण पर विचार करें|
आज सारी दुनिया में बेरोजगारी और महंगाई अपने पैर फैला रही है और दूसरी तरफ अत्यधिक काम का दवाब लोगों को तनाव ग्रस्त कर रहा है। परिवार संस्था बिखर गयी है और हमारी पारंपरिक विवाह संस्था भी धाराशायी हो रही है।
हमारे युवा साथी इंजिनीयरिंग या मेनेजमेंट की परीक्षा देकर निकलते है और उन्हें कैंपस सेलेक्शन के माध्यम से नौकरी मिल जाती है। नौकरी भी कैसी लाखों की। पिताजी ने हजार से आगे की गिनती नहीं की और बेटा सीधे ही लाखों की बात करने लगा। आकर्षक सैलरी पैकेज के साथ आकर्षक सुविधाएं भी। एसी और फाइव स्टार से नीचे बात ही नहीं।
उनसे फोन से बात करो तो कहेंगे कि अभी समय नहीं, घर आने की बात करो तो छुट्टिया नहीं। सारे ही नाते-रिश्तेदार बिसरा दिए गए। चाहे माँ मृत्यु शय्या पर हो या पिताजी, बेटे-बेटी के पास फुर्सत नहीं।
हाँ दूर बैठकर चिंता जरूर करेंगे और बड़े अस्पताल में जाने की सलाह देकर उनका बिल भी बढ़ाने का पूर्ण प्रयास करेंगे।
मेरे कहने का अर्थ केवल इतना सा है कि आखिर इन सारी समस्याओं का कोई हल भी है क्या?
मेरे पास इस समस्या का एक हल है, आपको मुफ्त में बताए देता हूं; नौकरियों मेंआज जो घाणी के बैल की तरह आपने लोगों को जोत रखा है उसे बन्द करो तो अपने आप बेरोजगारी दूर हो जाएगी। आज प्राइवेट सेक्टर में प्रत्येक व्यक्ति 12 घण्टे की नौकरी कर रहा है। एक व्यक्ति के स्थान पर दो को नौकरी दो और इतने वेतन देकर आप क्यों उसे आसमान पर बिठा रहे हैं और परिवार से दूरियां बढ़ाने में सहयोग कर रहे हैं?
अधिकतम वेतन निर्धारित करो। मेरा एक दोस्त बैंक का मेनेजर है, वह सुबह नौ बजे बैंक जाता है और रात आठ बजे के बाद ही आ पाता है। यह क्या है? कहाँ जाएगा उसका परिवार? आज यदि कीसी कम्पनी में एक लाख व्यक्ति काम कर रहे हैं तो इस नीति से दो लाख कर्मचारी हो जाएंगे और वेतन में भी वृद्धि नहीं होगी। क्या आवश्यकता है करोड़ों के पेकेज देने की? इन पेकेजों ने ही मंहगाई को बढ़ाया है। जब एक नवयुवा को पचास हजार रूपया महिना वेतन दोगे तो वह सीधा मॉल में ही जाकर रुकता है और बाजार में जो सामान 100 रू में मिलती है उसके वह 1500 रू. देता है। बेचारे माता-पिता तो रातों-रात बेचारे ही हो जाते हैं क्योंकि उनका लाड़ला लाखों जो कमा रहा है। इसलिए बेरोजगारी के साथ समस्त पारिवारिक और मंहगाई की समस्या से निजात पाने का एक ही तरीका है कि इन बड़ी कम्पनियों को अपनी नीति बदलनी होगी। समाज को इन पर दवाब बनाना होगा नहीं तो प्रत्येक युवा तनाव का शिकार हो जाएगा।

No comments:

Post a Comment